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Sunday, February 27, 2011


तेरी दुनिया से हो के मजबूर चला
मैं बहुत दूर, बहुत दूर, बहुत दूर चला


इस कदर दूर के फिर लौट के भी आ ना सकू
एसी मंजिल के जहां खुद को भी मैं पा ना सकू
और मजबूरे हैं क्या इतना भी बतला ना सकू

आँख भर आई अगर अश्कों को मैं पी लूंगा
आह निकली जो कभी होठों को मैं सी लूंगा
तुझसे वादा हैं किया इसलिए मैं जी लूंगा

खुश रहे तू हैं जहां, ले जा दुवाएं मेरी
तेरी राहों से जुदा हो गयी राहें मेरी
कुछ नहीं साथ मेरे, बस हैं खताएं मेरी

Thursday, December 2, 2010

चाहत

अपने महबूब को चाँद कहने वालो….
टूटे सपनों से चौंक कर उठने वालो….
 कभी देखो मेरे चाँद को जो आसमा में छाया है
हो रही मुलाकात मेरी, ये आज फिर मुझसे मिलने आया है 
मेरे चाँद की खूबसूरती को समेंटने की कोशिश करने वालो, ये कोई सुंदरी की काया है
सदियों से समेंट पाया मैं, आज फिर कोशिश की तो अपने चाँद को और भी खूबसूरत पाया हैI  

Wednesday, December 1, 2010

खामोशी


दर्द कुछ घटता नहीं  है, क्या करें ,
दिल कहीं लगता नहीं है, क्या करें.

रात काली स्याह इतनी देर थी,

दिन में कुछ दीखता नही है क्या करें .

बाँध था जो सब्र का बरसों तलक,
बाढ़ आ कर ढा गयी है क्या करें .

ख्वाब - खाली थे, बहुत खामोश थे,

कोई छम से आ गयी हैं क्या करें .
देख कर इक बार उनको रूबरू,
ख़त से जी भरता नहीं है क्या करें .